Sunday, March 7, 2021
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Top 10 रक्षाबंधन बधाई संदेश। Rakshabandhan Status in Hindi

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rakshabandhan whatsapp status

Top 10 रक्षाबंधन बधाई संदेश

दीदी थाली सजाऐगी चांदी की थाल मे
भाई को राखी बांधेगी अपनी हैं पसंद से
सुंदर सी राखी का सुदंर सा तोहफा
भाई बहन का रिश्ता सबसे अनोखा
Happy Raksha Bandhan My Dear Sister

रेशम की डोरी या एक आंटी
बांध देना कलाई पर,
मगर बहन चीन की राखी मत खरीदना,
हर भाई गया है तेरा लड़ाई पर ।।
Happy Rakshabandhan

rakshabandhan whatsapp status

भेजी नहीं है राखी किसी गैर के साथ में,
खुद ही आकर बधंवा लेना अपनी बहन के हाथ से।
लूंगी नहीं कोई तोहफा उस कोरियर वाले के हाथ से,
खुद ही लेते आना खोलेंगे उसे साथ में।
हाँ! गुस्सा और नाराजगी छलक रही हर बात में
इस बार तो राखी मनाएंगे तुम्हारे ही साथ में।

काश मेरी होती अपनी बहन
हम भी तो उससे लड़ पाते
रोती कभी तो हम उसे दुलार पाते
लड़ाई तो होती रोज तो क्या
पर अपनी जज़्बात तो कह पाते
हा वो मेरी महोब्बत होती अपनी
उसकी धड़कन को तो समझ पाता
बिन कहे बिन सुने जज्बातों को पढ़ पाता
उनकी ख्वाइश को पूरी करने की कोशिश तो करता
अपनी हर जज़्बात को बयां तो उससे कर पाता
मेरी हर बातो को वो भी समझ पाती
बिन कहे बिन सुने मेरे आंखों पढ़ पाती
मेरे वो हर दुख़ में मुझे गले तो लगा पाती
हा, तुम्हारी कमी मुझे खलती है हमेशा
काश मेरी अपनी बहन भी होती

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यूट्यूब देख देखकर
नई नई डिश खोज लती है।।
जब जब मैं रूठ जाऊ,
हर बार मुझे मनाती है।
सबसे सिफारिश करके वो
मेरी हर जिद मानवती है।।
Happy Raksha Bandhan
My Dear Sister

याद है हमें हमारा वो बचपन
वो लड़ना, वो झगड़ना और वो मना लेना
यही होता है भाई बहन का प्यार, और
इसी प्यार को बढ़ाने आ रहा है
रक्षा बन्धन का त्योहार
Happy Raksha Bandhan

लाल गुलाबी राखी से रंग रहा संसार
सूरज की किरणे खुशियों की बहार
चांद की चांदनी अपनों का प्यार
मुबारक हो आपको राखी का त्योहार
Happy Raksha Bandhan

रिश्ता है जन्मों का हमारा , भरोसे का और प्यार भरा ,
चलो भईया, इसे बाँधे राखी के अटूट बँधन में …
Happy Raksha Bandhan to my dearest brother!!

खी कर देती है, सारे गिले-शिकवे दूर …इतनी ताकतवर होती है कच्चे धागों की पावन डोर
याद है हमारा वो बचपन , वो लड़ना – झगड़ना और वो मना लेना,
यही होता है भाई – बहन का प्यार,
और इसी प्यार को बढ़ाने के लिए आ रहा है रक्षा बंधन का त्यौहार।

साथ पले और साथ बढ़े हैं , खूब मिला बचपन में प्यार।,
भाई बहन का प्यार बढ़ाने आया ये त्यौहार ,
Happy Raksha Bandhan to all !!

आखिर रक्षा बंधन की शुरुआत कहाँ से हुई और क्यों जाने ?

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rakhi kyu manai jati hai

रक्षाबंधन(raksha bandhan) के दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसके दीर्घायु होने की कामना करती है। कहते हैं इस धागे का संबंध अटूट होता है। जब तक जीवन की डोर और श्वांसों का आवागमन रहता है एक भाई अपनी बहन के लिए और उसकी सुरक्षा तथा खुशी के लिए दृढ़ संकल्पित रहता है।

rakhi kyu manai jati hai
भाई और बहन का रिश्ता सबसे खास होता है. इस रिश्ते में भले ही कितनी भी लड़ाईयां और नोंक-झोंक क्यों ना होती है, लेकिन भाई-बहन हर मुसीबत में एक-दूसरे का साथ निभाते है. भाई-बहन के प्यार का प्रतीक सबसे खास त्योहार रक्षाबंधन होता है, जिसका दोनों ही काफी बेसब्री से इंतेजार करते हैं. रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाईयों पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहनों को जिंदगीभर रक्षा का वचन देते हैं.

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हमारे देश में राखी के इस पावन दिन से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिससे इस अनूठे त्योहार की विशेषता का पता चलता है।इस रक्षा बंधन के मौके पर आइए जानते हैं कुछ ऐसी कहानियां जो भाई-बहन के अटूट प्रेम के  त्योहार की विशेषता को दिखता है।

यम-यमुना रक्षा बंधन:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राखी के त्योहार की शुरुआत मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना के बीच रक्षा बंधन से भी मानी जाती है। यमुना ने अपने भाई यम को राखी बांधी थी।  यम ने इस पर यमुना को अमरत्व का वरदान दिया। मृत्यु के देवता यम ने इस त्योहार को लेकर वरदान दिया था कि जो भाई रक्षा बंधन के अवसर पर बहन से राखी बंधवाता है और उसकी आजीवन सुरक्षा का वचन देता है, तो उसे सुरक्षा की प्राप्ति होगी।

कैसे कृष्ण-द्रौपदी से शुरुआत हुआ रक्षा बंधन :-

रक्षा बंधन या  राखी या रक्षा सूत्र बांधने की सबसे पहली कहानी महाभारत में आती है, जहां भगवान श्री कृष्ण को द्रौपदी द्वारा राखी बांधने की कहानी है। जहां भगवान श्री कृष्ण को द्रौपदी द्वारा राखी बांधने की कहानी है।
महाभारत में वर्णन है  भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से चेदि नरेश शिशुपाल का वध कर दिया था। तब इसी दौरान उनकी अंगुली कट गई और उससे खून बहने लगा।
rakhi ki kahani in hindi
यह देखकर  रानी द्रौपदी विचलित हुई और अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर कृष्ण की कटी अंगुली पर बांध दी।कृष्ण ने इस पर द्रौपदी से वादा किया कि वे भी मुश्किल वक्त में द्रौपदी के काम आएंगे

 

लक्ष्मी-बलि:-

देवी लक्ष्मी और राजा बलि के बीच राखी बांधने को लेकर भी एक कथा प्रचलित है. इसके अनुसार देवी लक्ष्मी ने एक बार खुद को आश्रयहीन महिला बताते हुए राजा बलि के महल में शरण मांगी. बलि ने देवी को सहर्ष अपने महल में ठहरने को कहा. सावन पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर एक सूती धागा बांधते हुए उनसे रक्षा करने की मांग की।

जब राजा बलि ने इसका तात्पर्य पूछते हुए उनसे वरदान मांगने को कहा तो देवी लक्ष्मी ने द्वारपाल की तरफ इशारा किया. द्वारपाल दरअसल विष्णु थे, जो राजा बलि की सुरक्षा में तैनात थे. देवी लक्ष्मी की रक्षा का वचन दे चुके राजा बालि ने इस पर विष्णु से कहा कि वह लक्ष्मी के साथ अपने निवास पर लौट जाएं. भगवान विष्णु ने भी इसके बाद राजा बलि को आश्वासन दिया कि वे साल के 4 महीने उनके साथ रहेंगे।

इस तरीके से रक्षा बंधन की शुरुआत हुई जो प्राचीन काल से ये सिर्फ यही नहीं बना इसके पीछे का उद्देश्य बहुत ही गहरा और अच्छा है।

Raksha Bandhan 2020: ये है राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त

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rakhi muhurat 2020

वैश्विक महामारी  कोरोना के इस संकट काल में भाई बहन का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन भी आ गया है । वैसे तो देश में अभी सारे परिवहन के साधन अभी बंद पड़े हुए है। बस हो , ट्रैन हो या हवाई जहाज़ इस कोरोना काल में कोई भी परिवहन का साधन चालू नहीं है । ऐसे में इस साल कई भाइयो की कलाई सुनी रह जायगी , बहुत सी बहने इस वर्ष अपने भाई के घर नहीं जा पाएगी।
rakhi muhurat 2020

भाई और बहन का रिश्ता सबसे खास होता है. इस रिश्ते में भले ही कितनी भी लड़ाईयां और नोंक-झोंक क्यों ना होती है, लेकिन भाई-बहन हर मुसीबत में एक-दूसरे का साथ निभाते है. भाई-बहन के प्यार का प्रतीक सबसे खास त्योहार रक्षाबंधन होता है, जिसका दोनों ही काफी बेसब्री से इंतेजार करते हैं. रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाईयों पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहनों को जिंदगीभर रक्षा का वचन देते हैं.

29 सालों के बाद बन रहा शुभ संयोग

दोस्तों जैसा की हम सब जानते है की  सावन महीने की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है, इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है, जो 29 सालों के बाद आया है. इस बार ये त्योहार 3 अगस्त सावन के आखिरी सोमवार के दिन ही पड़ रहा है. ये रक्षाबंधन काफी खास होने वाला है क्योंकि इस साल इस त्योहार पर सर्वार्थ सिद्धि और आयुष्मान दीर्घायु का शुभ संयोग बन रहा है.

ऐसा माना जाता है कि राखी शुभ मुहूर्त में ही बांधी जानी चाहिए. जब बहनें अपनी भाईयों की कलाई पर राखी बांधने, तो उस समय भद्रा नहीं होनी चाहिए. कहते हैं कि रावण की बहन से उसे भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, इसलिए रावण का विनाश हो गया.

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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

पंचांगों के मुताबिक 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भ्रदा है. रक्षाबंधन सुबह साढ़े 9 बजे से शुरू हो जाएगा. इस दौरान दोपहर एक बजकर 35 मिनट से शाम 4 बजकर 35 मिनट तक राखी बांधने का सबसे अच्छा समय बताया जा रहा है, इसके बाद शाम को 07:30 बजे से 09:30 बजे तक का समय भी राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा.रक्षा सूत्र बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर बैठाएं. अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो सर्वश्रेष्ठ है. भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें. राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें. उसको मिठाई खिलाएं.

इस दिन सुबह 9 :30 से 10:30 बजे तक शुभ, दोपहर 1:30 से 3 बजे तक चर, दोपहर 3 से 4:30 बजे तक लाभ, शाम 4:30 से 6 बजे तक अमृत और शाम 6 से 7:30 बजे तक चर का चौघड़िया बताया जा रहा है. सोमवार के दिन रक्षाबंधन होने से अन्न और धनधान्य के लिए अच्छे अवसर रहेंगे.पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 अगस्त की रात्रि 08:36 से शुरू हो जाएगी. पंडितों के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 3 अगस्त की रात्रि 08:29 पर हो रहा.

इस बार राखी पर बहुत ही अच्छे ग्रह नक्षत्रों का संयोग बन रहा है. सोमवार को आयुष्मान दीर्घायु योग है, यानि भाई-बहन दोनों की आयु लंबी हो जाएगी. साथ ही 3 अगस्त को सावन के आखिरी सोमवार के दिन ही पूर्णिमा है. ऐसा संयोग बेहद कम होता है, जब सोमवार को ही पूर्णिमा हो.

कोरोना ने त्योहार की रौनक फीकी

हालांकि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने सभी त्योहारों का रंग फीका कर दिया. इस बार रक्षाबंधन के दौरान बाजारों में वो रौनक नहीं देखने को मिल रही है, जो हर साल होती है. वहीं इस दौरान जो भाई-बहन दूर रहते हैं, उनका एक-दूसरे से मिलना भी मुश्किल हो रहा है. हालांकि दूर-दूर रहकर भी भाई-बहन इस त्योहार वीडियो कॉल के जरिए इस त्योहार को मना सकते हैं.

बहनें वीडियो कॉल पर भाई को देखते हुए भगवान कृष्ण की तस्वीर सामने रखकर उनके सामने राखी रख दें,भाई भी वीडियो कॉल पर ही बहनों को आर्शीवद दे |

आरती :खाटू श्याम बाबा की (khatu shyam aarti )

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aarti khatu shyam

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
aarti khatu shyam
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
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आरती: ॐ जय जगदीश हरे! (Aarti: Om Jai Jagdish Hare)
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय – जयकार करे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम – श्याम उचरे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त – जन, मनवांछित फल पावे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

जानकारी खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में

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kaise pahuche khatu shyam mandir

दोस्तों आज हम बात करने वाले है खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में, पिछले पोस्ट में हमने जाना था की खाटू शयम जी का मंदिर क्यों बना, इसके पीछे की वजह क्या थी, और क्यों यह इतना प्रसिद्ध है, आज हम बात करने वाले है मंदिर के आकार और वह दर्शन करने के लिए निर्धारित किये गए समय तथा वह की व्यवस्थाओ के बारे में।

ऐसा है मंदिर का आकार
श्याम बाबा का यह मंदिर श्वेत संगमरमर का बना एक अनूठे शैली का है , यह तीन मंजिलो में बना है , जिसमे प्रथम में खाटू श्याम जी चमत्कारी मूर्ति स्थापित है। और ऊपर की मंज़िलो में मंदिर की पूजा पाठ सम्भंदित अन्य कार्य किये जाते है। इस मंदिर के शिखर अर्ध गोलाकार है तथा इसके दोनों तरफ दो छोटे छोटे गुम्बज स्थित है । मंदिर का द्वार एक सुन्दर विशेष आकार में निर्मित है।
kaise pahuche khatu shyam mandir

दर्शन करने का समय
इस मंदिर में दर्शालु की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से यह दर्शन करने का समय अलग अलग है
इसलिए शरद ऋतू में यह दर्शन करने का समय प्रातः 5:30 बजे से लेकर 10 बजे तक तथा शाम में 4 बजे से लेकर रात्रि में 9 बजे तक खुला रहता है।
और ग्रीष्म ऋतू में समय में थोड़ा परिवर्तन होता है, ग्रीष्म ऋतू में मंदिर प्रातः 4:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम में 4 बजे से रात्रि में 10 बजे तक श्रद्धालु दर्शन का लाभ ले सकते है।

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जाने क्यों : दादा भीम को अनजाने में पिटा था पोते बर्बरीक ने

ठहरने की व्यवस्था
खाटू श्याम जी में ठहरने की व्यवस्था पहले कम थी पर , श्याम बाबा की प्रसिद्धि बढ़ने पर यह श्रद्धालु की संख्या दिन दुनि रात चौ गुनी हो गयी , अब यह ठहरने की अति उत्तम व्यवस्था है , मंदिर के आसपास बहुत होटलो का निर्माण हो चूका है, मंदिर के आसपास धर्मशालाओ का भी निर्माण किया गया है , मेले के समय यह प्रशासन द्वारा अतिरिक्त व्यवस्था भी की जाती है।

कैसे पहुंचे बाबा के दरबार
खाटू श्याम जी के इस पवित्र स्थान तक पहुंचने के लिए वायु मार्ग में सबसे नज़दीक जयपुर और दिल्ली के हवाई अड्डे है जहा से मंदिर 80 एवं 266 किलोमीटर है , वही रिंग नगर से इसकी दुरी महज 17 किलो मीटर है। सड़क मार्ग से भी यह आसानी से पहुँचा जा सकता है।

तो दोस्तों यदि आप भी बाबा श्याम के दीवाने है तो इस जानकारी को अपने सभी मित्रो से शेयर करे , और यदि आपके आसपास भी ऐसे हे चमत्कारी मंदिर है तो हमे बताये , हम आपकी दी हुई जानकारी हमारी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ शेयर करेंगे।
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