Tuesday, October 27, 2020
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आरती :खाटू श्याम बाबा की (khatu shyam aarti )

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aarti khatu shyam

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
aarti khatu shyam
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
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मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय – जयकार करे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम – श्याम उचरे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त – जन, मनवांछित फल पावे॥
॥ॐ जय श्री श्याम हरे…॥

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

जानकारी खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में

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kaise pahuche khatu shyam mandir

दोस्तों आज हम बात करने वाले है खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में, पिछले पोस्ट में हमने जाना था की खाटू शयम जी का मंदिर क्यों बना, इसके पीछे की वजह क्या थी, और क्यों यह इतना प्रसिद्ध है, आज हम बात करने वाले है मंदिर के आकार और वह दर्शन करने के लिए निर्धारित किये गए समय तथा वह की व्यवस्थाओ के बारे में।

ऐसा है मंदिर का आकार
श्याम बाबा का यह मंदिर श्वेत संगमरमर का बना एक अनूठे शैली का है , यह तीन मंजिलो में बना है , जिसमे प्रथम में खाटू श्याम जी चमत्कारी मूर्ति स्थापित है। और ऊपर की मंज़िलो में मंदिर की पूजा पाठ सम्भंदित अन्य कार्य किये जाते है। इस मंदिर के शिखर अर्ध गोलाकार है तथा इसके दोनों तरफ दो छोटे छोटे गुम्बज स्थित है । मंदिर का द्वार एक सुन्दर विशेष आकार में निर्मित है।
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दर्शन करने का समय
इस मंदिर में दर्शालु की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से यह दर्शन करने का समय अलग अलग है
इसलिए शरद ऋतू में यह दर्शन करने का समय प्रातः 5:30 बजे से लेकर 10 बजे तक तथा शाम में 4 बजे से लेकर रात्रि में 9 बजे तक खुला रहता है।
और ग्रीष्म ऋतू में समय में थोड़ा परिवर्तन होता है, ग्रीष्म ऋतू में मंदिर प्रातः 4:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम में 4 बजे से रात्रि में 10 बजे तक श्रद्धालु दर्शन का लाभ ले सकते है।

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ठहरने की व्यवस्था
खाटू श्याम जी में ठहरने की व्यवस्था पहले कम थी पर , श्याम बाबा की प्रसिद्धि बढ़ने पर यह श्रद्धालु की संख्या दिन दुनि रात चौ गुनी हो गयी , अब यह ठहरने की अति उत्तम व्यवस्था है , मंदिर के आसपास बहुत होटलो का निर्माण हो चूका है, मंदिर के आसपास धर्मशालाओ का भी निर्माण किया गया है , मेले के समय यह प्रशासन द्वारा अतिरिक्त व्यवस्था भी की जाती है।

कैसे पहुंचे बाबा के दरबार
खाटू श्याम जी के इस पवित्र स्थान तक पहुंचने के लिए वायु मार्ग में सबसे नज़दीक जयपुर और दिल्ली के हवाई अड्डे है जहा से मंदिर 80 एवं 266 किलोमीटर है , वही रिंग नगर से इसकी दुरी महज 17 किलो मीटर है। सड़क मार्ग से भी यह आसानी से पहुँचा जा सकता है।

तो दोस्तों यदि आप भी बाबा श्याम के दीवाने है तो इस जानकारी को अपने सभी मित्रो से शेयर करे , और यदि आपके आसपास भी ऐसे हे चमत्कारी मंदिर है तो हमे बताये , हम आपकी दी हुई जानकारी हमारी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ शेयर करेंगे।
merikahani@hindudharm.xyz इस ईमेल एड्रेस पर हमे जानकारी भेजे 

खाटू श्याम बाबा की कहानी Story of Khatu Shyam

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खाटू श्याम बाबा की कहानी Story of Khatu Shyam

दोस्तों आज हम बात करने वाले है राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल खाटू श्याम जी के बारे में , खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के पवित्र स्थानों में से एक है, लेकिन खाटू श्याम का यह मंदिर यह लगने वाले मेले को लेकर ज्यादा चर्चित है |
खाटू श्याम बाबा की कहानी Story of Khatu Shyam

जो प्रति वर्ष फरवरी और मार्च महीने के मध्य में लगता है , यह मेला काफी भीड़भाड़ वाला होता है , तथा यह जीवन के कई रंग दिखाई पड़ते है , यह पर साझी रंग बिरंगी दुकाने यात्रियों का मन मोह लेते है। इस मेले में यात्री ऊठ तथा घुड़ सवारी का आनंद लेते है।

पुराणों के अनुसार कुरुक्षेत्र में जब महाभारत का युद्ध होना था , उस समय भीम का पोता इस युद्ध में भाग लेना चाहता था , तब श्री कृष्णा को लगा की अगर उसने युद्ध में भाग लिया तो पांडव यह युद्ध आसानी से जीत जायगे परन्तु न्याय की अभिव्यक्ति नहीं हो पाएगी
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जाने क्यों : दादा भीम को अनजाने में पिटा था पोते बर्बरीक ने

इसलिए श्री कृष्णा ब्राह्मण रूप में अवतरित हुए और भीम के पोता जिसका नाम बर्बरीक था उससे उसका सर माँगा , तब बिना किसी हिचकिचाहट के बर्बरीक ने अपने प्राण त्याग कर जानकी नंदन श्री कृष्णा की आज्ञा का पालन किया,इस पर श्री कृष्णा अति प्रसन्न हुए और उसे दो वरदान दिए ,

प्रथम यह था की वह एक पहाड़ी पर से इस युद्ध को देख सकता है और दूसरा था की वह श्री कृष्णा के साथ ही इस स्थान पर पूजा जा सकेगा , इसलिए इस स्थान का नाम खाटू श्याम जी पड़ा , और यह एक पवित्र स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध हो गया ,खाटू श्याम जी को श्याम बाबा के नाम से भी जाना जाता है।

तो दोस्तों यदि आप भी बाबा श्याम के दीवाने है तो इस जानकारी को अपने सभी मित्रो से शेयर करे , और यदि आपके आसपास भी ऐसे हे चमत्कारी मंदिर है तो हमे बताये , हम आपकी दी हुई जानकारी हमारी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ शेयर करेंगे।
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जाने क्यों : दादा भीम को अनजाने में पिटा था पोते बर्बरीक ने

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bheem aur barbik ka yudh
हिडिम्ब वध के बाद कुंती की आज्ञा पाकर भीम ने हिडिम्बा के साथ गांधर्व विवाह (लिव इन रिलेशन) किया था जिसके फलस्वरूप उन्हें घटोत्कच नामक पुत्र हुआ जो की 60000 राक्षशो का राजा हुआ. जन्म लेते ही वो तरुण हो गया था उसका सर घड़े के समान था इसलिए कुंती ने उसका नाम घटोत्कच (घड़े के जैसे सर वाला) रखा था.
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घटोत्कच के लिए श्री कृष्ण ने एक लड़की बताई जो की राक्षस मुर की बेटी थी, मुर का वध कृष्ण ने किया था तब मौरवी श्री कृष्ण से युद्ध करने लगे. उसके पास काली माँ का दिया हुआ खडग था इसलिए वो कृष्ण पर भारी पड़ने लगी तब कृष्ण ने सुदर्शन से उसे मारना चाहा तो काली प्रकट हुई और उन्हें रोक दिया.

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तब काली ने ही बताया था की भीम का पुत्र इसका पति बनेगा, तब घटोत्कच ने मौरवी को पहले बुद्धि से और फिर बल से जित लिया और ऐसे दोनों का विवाह हुआ. दोनों के घर एक पुत्र ने जन्म लिया जिसके बाल घुंघराले थे और इसी लिए उसका नाम बर्बरीक रखा गया.

बर्बरीक भी पिता की भाँती जन्म से ही तरुण हो गया और वो माँ के कहने पर तपस्या करने लगा…

वो महिसागर नामक तीर्थ में एक कुंड में छुपकर तपस्या करता था, संयोग से वनवासी पांडव वंही आये जिन्होंने कभी बर्बरीक को देखा नहीं था. भीम सबके लिए पानी लाने गया लेकिन वो वेदवाक्यों का उल्लंघन करते हुए उस कुंड में बिना हाथ पैर धोये जूथ कर पानी पिने ही वाला था की बर्बरीक ने उसे चेताया और जब वो नहीं माना तो दोनों के बिच युद्ध हुआ.

बर्बरीक युद्ध में भारी पड़ा उसने भीम को पिट कर उठा लिया और उसे समुन्द्र में फेंक के डुबोने ही वाला था की भगवान् शिव प्रकट हुए और उसे कहा की भीम उसका ही दादा है. तब बर्बरीक ने पहले तो माफ़ी मांगी और फिर दादा पर अनजाने में ही हाथ उठाने के अपराध में समुद्र में कूद कर प्राण त्यागना चाहा.
लेकिन तब समुन्द्र ने उसे डूबने नहीं दिया और कहा की अनजाने में किया पाप, पाप नहीं तुम जाओ तुम्हे बहुत से बड़े काम करने है. तब बर्बरीक अपने पूर्वजो से मिला और तपस्या कर सर्पमाता से ऐसा सिंदूर लिया जिससे कुछ ही पलो में महाभारत युद्ध ख़त्म हो सकता था लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे ऐसा करने नहीं दिया और उसका सर सुदर्शन से उड़ा दिया.
वो पूर्व जन्म में एक गन्धर्व था जो गर्व से ये कहता था की भगवान् के जन्म लेने की क्या आवश्यकता में अकेले ही पृथ्वी का भार उतार दूंगा तब उसे श्राप मिला था जो कृष्ण के हाथो वध से उतरा.

अयोध्या में चांदी की इस ईंट से रखी जाएगी राम मंदिर की नींव

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ram mandir chandi ki eit

दोस्तों जैसा की आप सभी को विदित है की अयोध्या में ५ अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन होना है , अयोध्या में श्री राम मंदिर के 5 अगस्त को होने वाले भूमिपूजन के कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर  हैं।
राम मंदिर की नींव चांदी की ईंट से रखी जाएगी।
ram mandir chandi ki eit

आज सोशल मीडिया पर इस चांदी की ईंट की पहली तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर को फैजाबाद के भाजपा सांसद लल्लू सिंह ने ट्वीट किया है। इस ईंट का वजन 22 किलो 600 ग्राम है।

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ऐसा मंदिर जहा नहाने से सही हो जाती है हर बीमारी

लल्लू सिंह ने चांदी की ईंट की तस्वीर को साझा करते हुए लिखा कि यह मेरा सौभाग्य रहेगा कि इस पवित्र ईंट को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्थापित किए जाने के समय मुझे प्रांगण में उपस्थित होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
ram mandir me rakhi jane wali chandi ki eit

दोस्तों कल तक जो राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने राम मंदिर की नीव में टाइम कैप्सूल रखे जाने की घोषणा की थी उसको ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय द्वारा अफवाह बताया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के कामेश्वर चौपाल और चमत राय के बयानों से तो लगता है की ट्रस्ट के सदस्यों में तालमेल सही नहीं है। वैसे नीव में एक तामपत्र रखा जायगा जिसमें राम जन्म भूमि का संक्षिप्त इतिहास व शिलान्यास का ब्यौरा लिखा जाएगा। इसी ताम्रपत्र को टाइम कैप्सूल मान लिया गया।