Saturday, June 19, 2021
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Ramchandra Ji Arti : श्री रामचंद्रजी की आरती

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ram ji ki aarti hindi me

श्री रामचंद्रजी की आरती : Ramchandra Ji Arti

आरती कीजै रामचन्द्र जी की।
हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥

पहली आरती पुष्पन की माला।
काली नाग नाथ लाये गोपाला॥

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दूसरी आरती देवकी नन्दन।
भक्त उबारन कंस निकन्दन॥

तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे।
रत्‍‌न सिंहासन सीता रामजी सोहे॥

चौथी आरती चहुं युग पूजा।
देव निरंजन स्वामी और न दूजा॥

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पांचवीं आरती राम को भावे।
रामजी का यश नामदेव जी गावें॥

श्री राम स्तुति

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं |
नव कंजलोचन, कंज – मुख, कर – कंज, पद कंजारुणं ||

कंन्दर्प अगणित अमित छबि नवनील – नीरद सुन्दरं |
पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतवरं ||

भजु दीनबंधु दिनेश दानव – दैत्यवंश – निकन्दंन |
रधुनन्द आनंदकंद कौशलचन्द दशरथ – नन्दनं ||

सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषां |
आजानुभुज शर – चाप – धर सग्राम – जित – खरदूषणमं ||

इति वदति तुलसीदास शंकर – शेष – मुनि – मन रंजनं |
मम ह्रदय – कंच निवास कुरु कामादि खलदल – गंजनं ||

मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो |
करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो ||

एही भाँति गौरि असीस सुनि सिया सहित हियँ हरषीं अली |
तुलसी भवानिहि पूजी पुनिपुनि मुदित मन मन्दिरचली ||

दोहा

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि |
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ||

श्री रामाष्टकः

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशव ।
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा ।।

हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते ।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम् ।।

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम् ।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव सम्भाषणम् ।।

बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम् ।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि रामायणम् ।।

Ram mandir whatsapp status | राम मंदिर शुभकामनाये व्हाट्सप्प स्टेटस

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आज के समय में हर कोई श्री राम के नारे को कट्टर हिन्दुवाद का नारा बताता हैं| जितने भी कट्टर हिंदूवादी समाज या लोग हैं वो आज के समय में भगवा रंग को ज्यादा महत्व देते हैं क्योकि वे मानते हैं की यह भगवान्राम का प्रतीक हैं| कट्टर हिंदूवादी लोग हिंदुत्व को बढ़ाने के लिए समाज में राम के नारे सुनाकर जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं|
कल राम मंदिर स्थापना का भव्य दिवस है , अगर आप का दिल भी खुश है और आप भी सच्चे हिन्दू है तो इसको हर व्हाट्सप्प ग्रुप में फैला दो ताकि हर हिन्दू अपना व्हाट्सअप्प स्टेटस लगा सके

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तुम जितना मुझसे टकराओगे,
मैं उतना #कट्टर होता जाऊंगा।।
ॐजय जय श्री रामॐ
ॐजय जय महाकालॐ

राम जी की ज्योति से नूर मील है,
सबके दिलो को शूरुर मिल्ता है,
जो भी जाम है राम जी के द्वार,
कुछ ना कुछ जरुर मिल गया है.
“ जय श्री राम ”

जय श्री राम का नारा लगा के हम दुनियाँ में छा गये,
हमारे दुश्मन भी छुपकर बोले, वो देखो जय श्री राम के भक्त आ गये।

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गरज उठे गगन सारा,
समुद्र छोड़ें अपना किनारा,
हिल जाए जहान सारा,
जब गूंजे जय श्री राम का नारा.

मुसलमान भी दवा बेचते वक्त कहता हैं,
रामबाण इलाज हैं अल्लाबाण नही, ऐसी महिमा हैं राम नाम की

फतवा नहीं बस भगवा का नाम होगा,
मेरे देश में अब सलाम नहीं सिर्फ जय श्रीराम होगा।

हम पर ऊँगली सोच समझ कर उठाना,
हम राम भक्त हे मारते नहीं , मार डालते हे
** जय श्री राम **

बेशक पहन लो हमारे जैसे कपड़ें और ज़ेवर,
पर कहा से लाओगे राम भक्तो वाले तेवर.
जय श्री श्री श्री राम…!!!

AttiTuDe तो अपना भी खतरनाक है,
जिसे भुला दिया SO भुला दिया,
फिर एक ही शब्द याद रहता है,
Who R U ? जय श्री राम **

#मुसलमानों ने देखते देखते #56मुस्लिम राष्ट्र बना लिए,
आप और हम अपना एक #राष्ट्र नहीं बचा पा रहे,
बात #कड़वी है, पर #सच्ची है,#कट्टर बनो.
जय श्री राम…!!!!

सनातन धर्म में #कट्टर शब्द का प्रयोग ही निषेध है,
हमारा धर्म हमें पेड़ के पत्ते तोड़ने तक की आज्ञा नहीं देता,
ऐसे धर्म से हमारा संबंध है।

मैं अपने पुरखों का कर्जदार हूँ
जिन्होंने 800 साल मुग़लों से
200साल अँग्रेजो से लोहा लेते हुए मुझे
#कट्टर हिंदु बनाया.
Jai Shree Ram

मंगल भवन अमंगल हारी,
धुर्वे दशरथ अचर बिहारी,
राम सिया राम सिया राम
जय जय राम

हमारी ताकत का अंदाजा हमारे जोर से नही
दुश्मन के शोर से पता चलता है !
बोलो सिया पति राम चंद्र की जय….!!

जो तुम सोचते हो माना वो सही है
पर बात वो ही सही है , जो हमने कही है !
!!…जय..श्री..राम..!!

शोक उचे है रुतबा ऊँचा है
राम भक्तो के आगे ये ज़माना झुकता है !
श्री राम जय राम जय जय राम !!

हकूमत दूसरों के दम पर तो कोई भी कर ले ,
जो अपने दम पर छा जाए, वो हम है..!!
!!..जय श्री राम..!!

कल राम मंदिर स्थापना का भव्य दिवस है , अगर आप का दिल भी खुश है और आप भी सच्चे हिन्दू है तो इसको हर व्हाट्सप्प ग्रुप में फैला दो ताकि हर हिन्दू अपना व्हाट्सअप्प स्टेटस लगा सके

जाने जन्माष्टमी की प्रचलित लोक कथा | janmashtmi vrat katha

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janmashtmi vrat katha

द्वापर युग के अंत में मथुरा में उग्रसेन राजा राज्य करते थे। उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था। कंस ने उग्रसेन को बलपूर्वक सिंहासन से उतारकर जेल में डाल दिया और स्वयं राजा बन गया।
कंस की बहन देवकी का विवाह यादव कुल में वासुदेव के साथ निश्चित हो गया। जब कंस देवकी को विदा करने के लिए रथ के साथ जा रहा था तो आकाशवाणी हुई, हे कंस! जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से विदा कर रहा है उसका आठवाँ पुत्र तेरा संहार करेगा।

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आकाशवाणी की बात सुनकर कंस क्रोध से भरकर देवकी को मारने के लिए तैयार हो गया। उसने सोचा – न देवकी होगी न उसका कोई पुत्र होगा।

वासुदेव जी ने कंस को समझाया कि तुम्हें देवकी से तो कोई भय नहीं है। देवकी की आठवीं संतान से भय है। इसलिए मैँ इसकी आठवीं संतान को तुम्हे सौंप दूँगा।
कंस ने वासुदेव जी की बात स्वीकार कर ली और वासुदेव-देवकी को कारागार में बंद कर दिया। तत्काल नारद जी वहाँ आ पहुँचे और कंस से बोले कि यह कैसे पता चलेगा कि आठवाँ गर्भ कौन-सा होगा।
गिनती प्रथम से शुरू होगी या अंतिम गर्भ से। कंस ने नारद जी के परामर्श पर देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाले समस्त बालकों को एक-एक करके निर्दयतापूर्वक मार डाला।
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जन्माष्टमी का व्रत हो तो रखे ये सावधानी वरना हो सकते है ये नुकसान

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही जेल की कोठरी में प्रकाश फैल गया।
वासुदेव-देवकी के सामने शंख, चक्र, गदा एवं पदमधारी चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा, अब में बालक का रूप धारण करता हूँ।
तुम मुझे तत्काल गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दो और उनकी अभी-अभी जन्मी कन्या को लेकर कंस को सौंप दो। वासुदेव जी ने वैसा ही किया और उस कन्या को लेकर कंस को सौंप दिया।

कंस ने जब उस कन्या को मारना चाहा तो वह कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई और देवी का रूप धारण कर बोली कि मुझे मारने से क्या लाभ है? तेरा शत्रु तो गोकुल पहुँच चुका है।
यह दृश्य देखकर कंस हतप्रभ और व्याकुल हो गया। कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजे। श्रीकृष्ण जी ने अपनी आलौकिक माया से सारे दैत्यों को मार डाला।
बड़े होने पर कंस को मारकर उग्रसेन को राजगद्दी पर बैठाया।

जन्माष्टमी का महत्व

1.  इस दिन देश के समस्त मंदिरों का श्रृंगार किया जाता है।
2.  श्री कृष्णावतार के उपलक्ष्य में झाकियाँ सजाई जाती हैं।
3.  भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करके झूला सजा के उन्हें झूला झुलाया जाता है।

स्त्री-पुरुष रात के बारह बजे तक व्रत रखते हैं। रात को बारह बजे शंख तथा घंटों की आवाज से श्रीकृष्ण के जन्म की खबर चारों दिशाओं में गूँज उठती है। भगवान कृष्ण जी की आरती उतारी जाती है और प्रसाद वितरण किया जाता है।

इस लेख के साथ हम आशा करते हैं कि जन्माष्टमी के पावन पर्व पर आपको भगवन कृष्ण की असीम कृपा प्रदान हो।

जन्माष्टमी का व्रत हो तो रखे ये सावधानी वरना हो सकते है ये नुकसान

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janmashtmi ka muhurat

यदि आप भी जन्माष्टमी वाले दिन व्रत रखने के बारे में सोच रहे हैं तो ऐसे में आपको कुछ बातों को ध्यान में रखना होगा। इस दिन आपको भगवान कृष्ण की पूजा में अपना मन लगाना होगा।
यदि महिलाएं यह व्रत रखने वाली है तो ऐसा करना उनके लिए बेहद ही फायदेमंद  होगा। इस दिन व्रत रखने से आपके परिवार में सुख और समृद्धि बनी रहेगी। साथ ही संतना प्राप्ति की भी मनोकामना पूरी हो सकती हैं।

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जन्माष्टमी व्रत व पूजन विधि

1.  जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है।
2.  जन्माष्टमी व्रत को करने वाले को चाहिए कि व्रत से एक दिन पूर्व (सप्तमी को) हल्का तथा सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें और सभी ओर से मन और इंद्रियों को काबू में रखें।

3.  उपवास वाले दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें।
4.  हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल से स्नान (छिड़ककर) कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएँ। अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें।

5.  साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम क्रमशः लेते हुए विधिवत पूजन करें।
6.  जन्माष्टमी व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फ़ी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है।

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ज्यादा से ज्यादा फलों का सेवन करें

  • व्रत के दिन अधिक मात्रा में फल खाना आपको एनर्जी देगा। फलों में विटामिन के साथ ही न्यूट्रिएंट्स आपको तरोताजा रखेंगे।
  • पानी की अधिकता वाले फल जैसे वाटर मेलन और मस्क मेलन आदि भी ले सकते हैं। ये फल पानी की कमी को पूरा करने के साथ ही आपको जरूरी न्यूट्रिएन्ट्स प्रदान करेंगे।
  • न्यूट्रिएन्टिस की मात्रा बढ़ाने के लिए आप फलों के साथ ही दूध या दही भी मिक्स कर सकते हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2020, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

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janmashtmi 2020

हिंदुओं के सबसे पवित्र और बड़े त्योहारों में से एक कृष्ण जन्माष्टमी को माना जाता है। इस दिन को बेहद ही धूमधाम के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। जन्माष्टमी आने में अब वक्त ही कहां बचा है। कुछ जगहों पर ये त्योहार 23 को मनाया जा रहा है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आपका आत्मिक सुख जगाने का, आध्यात्मिक बल जगाने का पर्व है। जीव को श्रीकृष्ण-तत्त्व में सराबोर करने का त्यौहार है। तुम्हारा सुषुप्त प्रेम जगाने की दिव्य रात्रि है।

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श्रीकृष्ण का जीवन सर्वांगसंपूर्ण जीवन है। उनकी हर लीला कुछ नयी प्रेरणा देने वाली है। उनकी जीवन-लीलाओं का वास्तविक रहस्य तो श्रीकृष्ण तत्त्व का आत्मरूप से अनुभव किये हुए महापुरूष ही हमें समझा सकते हैं।

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जन्माष्टमी का व्रत हो तो रखे ये सावधानी वरना हो सकते है ये नुकसान
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कृष्ण जन्माष्टमी का मुहूर्त

1.  अष्टमी पहले ही दिन आधी रात को विद्यमान हो तो जन्माष्टमी व्रत पहले दिन किया जाता है।
2.  अष्टमी केवल दूसरे ही दिन आधी रात को व्याप्त हो तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है।
3.  अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और अर्धरात्रि (आधी रात) में रोहिणी नक्षत्र का योग एक ही दिन हो तो जन्माष्टमी व्रत रोहिणी नक्षत्र से युक्त दिन में किया जाता है।

4.  अष्टमी दोनों दिन आधी रात को विद्यमान हो और दोनों ही दिन अर्धरात्रि (आधी रात) में रोहिणी नक्षत्र व्याप्त रहे तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है।
5.  अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और अर्धरात्रि (आधी रात) में दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र का योग न हो तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाता है।
6.  अगर दोनों दिन अष्टमी आधी रात को व्याप्त न करे तो प्रत्येक स्थिति में जन्माष्टमी व्रत दूसरे ही दिन होगा।

जन्माष्टमी व्रत व पूजन विधि

1.  जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है।
2.  जन्माष्टमी व्रत को करने वाले को चाहिए कि व्रत से एक दिन पूर्व (सप्तमी को) हल्का तथा सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें और सभी ओर से मन और इंद्रियों को काबू में रखें।

3.  उपवास वाले दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें।
4.  हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल से स्नान (छिड़ककर) कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएँ। अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें।

5.  साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम क्रमशः लेते हुए विधिवत पूजन करें।
6.  जन्माष्टमी व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फ़ी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है।