Sunday, March 7, 2021
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शरद पूर्णिमा की रात को क्या करें, क्या न करें

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sharad purnima chand ka mahtva

शरद पूर्णिमा की रात को क्या करें, क्या न करें ?
दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं ।
इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें ।
नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करें।

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अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं। जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’
फिर वह खीर खा लेना।

Sharad Purnima Vrat Katha | शरद पूर्णिमा व्रत कथा

इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।
शरद पूनम दमे की बीमारी वालों के लिए वरदान का दिन है।
चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है।

शरद पूनम की चाँदनी का अपना महत्त्व है लेकिन बारहों महीने चन्द्रमा की चाँदनी गर्भ को और औषधियों को पुष्ट करती है।

अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है।
जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है ।

इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश आता है ।

सुख समृद्धि के लिए राशि अनुसार करे ये उपाय
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मेष
शरद पूर्णिमा पर मेष राशि के लोग कन्याओं को खीर खिलाएं और चावल को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएं। ऐसा करने से आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

वृष
इस राशि में चंद्रमा उच्च का होता है। वृष राशि शुक्र की राशि है और राशि स्वामी शुक्र प्रसन्न होने पर भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। शुक्र देवता को प्रसन्न करने के लिए इस राशि के लोग दही और गाय का घी मंदिर में दान करें।

मिथुन
इस राशि का स्वामी बुध, चंद्र के साथ मिल कर आपकी व्यापारिक एवं कार्य क्षेत्र के निर्णयों को प्रभावित करता है। उन्नति के लिए आप दूध और चावल का दान करें तो उत्तम रहेगा।

कर्क
आपके मन का स्वामी चंद्रमा है, जो कि आपका राशि स्वामी भी है। इसलिए आपको तनाव मुक्त और प्रसन्न रहने के लिए मिश्री मिला हुआ दूध मंदिर में दान देना चाहिए।

सिंह🐅
आपका राशि का स्वामी सूर्य है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर धन प्राप्ति के लिए मंदिर में गुड़ का दान करें तो आपकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन हो सकता है।

कन्या👩
इस पवित्र पर्व पर आपको अपनी राशि के अनुसार 3 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन में खीर खिलाना विशेष लाभदाई रहेगा।

तुला⚖
इस राशि पर शुक्र का विशेष प्रभाव होता है। इस राशि के लोग धन और ऐश्वर्य के लिए धर्म स्थानों यानी मंदिरों पर दूध, चावल व शुद्ध घी का दान दें।

वृश्चिक
इस राशि में चंद्रमा नीच का होता है। सुख-शांति और संपन्नता के लिए इस राशि के लोग अपने राशि स्वामी मंगल देव से संबंधित वस्तुओं, कन्याओं को दूध व चांदी का दान दें।

धनु
इस राशि का स्वामी गुरु है। इस समय गुरु उच्च राशि में है और गुरु की नौवीं दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी। इसलिए इस राशि वालों को शरद पूर्णिमा के अवसर पर किए गए दान का पूरा फल मिलेगा। चने की दाल पीले कपड़े में रख कर मंदिर में दान दें।

मकर
इस राशि का स्वामी शनि है। गुरु की सातवी दृष्टि आपकी राशि पर है जो कि शुभ है। आप बहते पानी में चावल बहाएं। इस उपाय से आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

कुंभ
इस राशि के लोगों का राशि स्वामी शनि है। इसलिए इस पर्व पर शनि के उपाय करें तो विशेष लाभ मिलेगा। आप दृष्टिहीनों को भोजन करवाएं।

मीन
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आपकी राशि में पूर्ण चंद्रोदय होगा। इसलिए आप सुख, ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

Sharad Purnima Vrat Katha | शरद पूर्णिमा व्रत कथा

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Sharad Purnima vrat katha

शरद पूर्णिमा व्रत कथा
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एक साहुकार के दो पुत्रियाँ थी।
दोनो पुत्रियाँ पुर्णिमा का व्रत रखती थी।
परन्तु बडी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधुरा व्रत करती थी।
परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की सन्तान पैदा ही मर जाती थी।
Sharad Purnima vrat katha
उसने पंडितो से इसका कारण पूछा तो उन्होने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी जिसके कारण तुम्हारी सन्तान पैदा होते ही मर जाती है। पूर्णिमा का पुरा विधि पुर्वक करने से तुम्हारी सन्तान जीवित रह सकती है।
उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधि पूर्वक किया।

Sharad Purnima ka Mahatva | शरद पूर्णिमा का महत्व

उसके लडका हुआ परन्तु शीघ्र ही मर गया। उसने लडके को पीढे पर लिटाकर ऊपर से पकडा ढक दिया।
फिर बडी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पीढा दे दिया।
बडी बहन जब पीढे पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया।
बच्चा घाघरा छुते ही रोने लगा। बडी बहन बोली-” तु मुझे कंलक लगाना चाहती थी।
मेरे बैठने से यह मर जाता।
“ तब छोटी बहन बोली, ”
यह तो पहले से मरा हुआ था।
तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है।
तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। “उसके बाद नगर में उसने पुर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।
इस प्रकार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है।
इससे प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

Sharad Purnima ka Mahatva | शरद पूर्णिमा का महत्व

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sharad purnima 2020

अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा कहलाती है शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है इस बार शरद पूर्णिमा का पर्व 30 अक्टूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा

इस व्रत में रात्रि के प्रथम प्रहर अथवा सम्पूर्ण निशीथ व्यापनी पूर्णिमा ग्रहण करना चाहिए जो पूर्णिमा रात के समय रहे वहीं ग्रहण करना चाहिए।

sharad purnima 2020

पूर्णिमा तिथि अक्टूबर 30, 2020 को 05:45 मिनट शाम से आरम्भ होकर अक्टूबर 31, 2020 को रात 08:18 मिनट पर समाप्त होगी।
पूर्णिमा की पूजा, व्रत और स्नान शुक्रवार यानी 30 अक्टूबर को ही होगा।
चन्द्रोदय 05:34 शाम को
Sharad Purnima Vrat Katha | शरद पूर्णिमा व्रत कथा

शरद पूर्णिमा के व्रत को कोजागार व्रत भी कहते हैं क्योंकि लक्ष्मी जी को जागृति करने के कारण इस व्रत का नाम कोजागार पड़ा इस दिन लक्ष्मी नारायण महालक्ष्मी एवं तुलसी का पूजन किया जाता है।
इस दिन श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था।

साथ ही माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात के समय भ्रमण में निकलती है यह जानने के लिए कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है।
उसी के अनुसार मां लक्ष्मी उनके घर पर ठहरती है। इसीलिए इस दिन सभी लोग जागते है ।

जिससे कि मां की कृपा उनपर बरसे और उनके घर से कभी भी लक्ष्मी न जाएं।
इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं।

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा ही शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है।
ज्‍योतिष के अनुसार,ऐसा कई वर्षों में पहली बार हो रहा है जब शरद पूर्णिमा और गुरुवार का संयोग बना है।
इस दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण इसे महापूर्णिमा भी कहते हैं।

पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।
हिन्दी धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं।
मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है।
तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है।

शरद पूर्णिमा विधान

इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे और ब्रह्मचर्य भाव से रहे।
इस दिन ताँबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढँकी हुई स्वर्णमयी लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करके भिन्न-भिन्न उपचारों से उनकी पूजा करें, तदनंतर सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर सोने, चाँदी अथवा मिट्टी के घी से भरे हुए 100 दीपक जलाए।

इसके बाद घी मिश्रित खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चाँदनी में रखें।
जब एक प्रहर (3 घंटे) बीत जाएँ, तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें।

तत्पश्चात भक्तिपूर्वक सात्विक ब्राह्मणों को इस प्रसाद रूपी खीर का भोजन कराएँ और उनके साथ ही मांगलिक गीत गाकर तथा मंगलमय कार्य करते हुए रात्रि जागरण करें।

तदनंतर अरुणोदय काल में स्नान करके लक्ष्मीजी की वह स्वर्णमयी प्रतिमा आचार्य को अर्पित करें।
इस रात्रि की मध्यरात्रि में देवी महालक्ष्मी अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए संसार में विचरती हैं और मन ही मन संकल्प करती हैं कि इस समय भूतल पर कौन जाग रहा है? जागकर मेरी पूजा में लगे हुए उस मनुष्य को मैं आज धन दूँगी।

शरद पूर्णिमा पर खीर खाने का महत्व

शरद पूर्णिमा की रात का अगर मनोवैज्ञानिक पक्ष देखा जाए तो यही वह समय होता है जब मौसम में परिवर्तन की शुरूआत होती है और शीत ऋतु का आगमन होता है।

शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसी से हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्राप्त होगी।

 

इस वजह से नहीं हो पाया था राधा कृष्णा का विवाह

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krishna radha vivah kyu nhi hua

आज पुरे देश में श्री कृष्णा जन्माष्टमी का महोत्सव मनाया जा रहा है। हिन्दू समाज में देवी तुल्य राधा रानी तथा सबके प्रिय नन्द के लाल श्री कृष्णा को प्रेम का प्रतिक माना जाता है।
वैसे तो श्री कृष्णा का विवाह रुक्मणि से हुआ थ। लेकिन राधा कृष्णा का प्रेम इतना ताकतवर था की आज भी कृष्णा के साथ राधा का नाम लिया जाता है।

वैसे तो रुक्मणि के अलावा भी नन्दलाल की कई पत्नियों को जिक्र होता है लेकिन कृष्णा का नाम तो राधा के साथ ही लिया जाता है।

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राधा कृष्णा के प्रेम की मिसाल तो हर जगह दी जाती है फिर क्या ऐसी वजह रही होगी की इतना प्रेम होने के बाद भी इनका विवाह नहीं हो पाया।
आज हम आपको उन वजह के बारे में बताने वाले है जिनकी वजह से ये प्रेमी शादी जैसे पवित्र बंधन में नहीं बंध सके और इनका प्रेम जानो जन्मांतर के लिए अमर हो गया।

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राधा कृष्णा की पहली मुलाक़ात

ऐसा माना जाता है की जब श्री कृष्णा और राधा जी की पहली मुलाक़ात हुई थी तब कृष्णा की उम्र महज ८ वर्ष थी तथा राधा रानी नन्दलाल से उम्र में ४ वर्ष बड़ी थी।

ये भी माना जाता है की जब राधा जी से विवाह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब में कहा था की कोई भला अपनी आत्मा से विवाह कैसे कर सकता है , राधा कृष्णा का प्रेम तो आत्मीय था।
कृष्णा और राधा की मुलाक़ात बालयकाल में हे हुई थी उसके बाद न तो कृष्णा कभी वृंदावन आये और ना ही महाभारत में राधा जी जिक्र है।

यह थी असली वजह

राधा और कृष्ण गोलोक में रहते थे, एक बार किसी बात को लेकर कृष्ण भक्त श्रीद्धमा से राधा जी की बहस हो गई थी जिसके बाद राधा जी ने उन्हें श्राप दिया कि तुम्हारा जन्म राक्षस योनि में होगा।
श्रीद्धमा ने भी राधा जी को श्राप दिया कि वे धरती लोक पर जन्म लेकर सौ वर्षों तक अपने प्रियतम से वियोग सहेंगी। उसके बाद वे श्रीहरि की संगति को प्राप्त होगीं

10 janmashtmi whatsapp status | जन्माष्टमी स्टेटस

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हिंदुओं के सबसे पवित्र और बड़े त्योहारों में से एक कृष्ण जन्माष्टमी को माना जाता है। इस दिन को बेहद ही धूमधाम के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। जन्माष्टमी आने में अब वक्त ही कहां बचा है। कुछ जगहों पर ये त्योहार 23 को मनाया जा रहा है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आपका आत्मिक सुख जगाने का, आध्यात्मिक बल जगाने का पर्व है। जीव को श्रीकृष्ण-तत्त्व में सराबोर करने का त्यौहार है। तुम्हारा सुषुप्त प्रेम जगाने की दिव्य रात्रि है।

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गोकुल में जिसने किया निवास, उसने गोपियों के संग रचा इतिहास , देवकी-यशोदा जिनकी मैया , ऐसे है हमारे कृषण कन्हैया! शुभ जन्मआष्ट्मी!

होता है प्यार क्या ??? दुनिया को जिसने बताया ….
दिल के रिश्तों को जिसने प्रेम से सजाया …
आज उन श्री कृष्ण का जन्मदिन है 🙂🙂
हैप्पी बर्थडे कृष्ण जी 🙂🙂

कृष्णा जिनका नाम , गोकुल जिनका धाम , ऐसे श्री कृष्णा भगवान् को हम सब का प्रणाम , जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

पलकें झुकें , और नमन हो जाए…
मस्तक झुके, और वंदन हो जाए…
ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, मेरे कन्हैया … कि ……
आप को याद करूँ ,और आपके,
दर्शन हो जाए…जय श्री कृष्णा

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माखन चुराकर जिसने खाया ,
बंसी बजाकर जिसने नचाया ,
ख़ुशी मनाओ उनके जन्मदिन की ,
जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया।

ओ पालन हारे निर्गुण ओ न्यारे…
तुमरे बिन हमरा कउनु नाहीं …
हमारी उलझन सुलझाओ भगवन ..
तुम्हे हमको है संभाले , तुम्ही हमारे रखवाले

प्रेम से श्री कृष्ण का नाम जपो ,
दिल की हर इच्छा पूरी होगी ,
कृष्ण आराधना में तल्लीन हो जाओ ,
उनकी महिमा जीवन खुशहाल कर देगी।

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की
कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं…

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की

श्री कृष्ण के कदम आपके घर आये ,
आप खुशियों के दीप जलाएँ ,
परेशानी आपसे आँखे चुराएँ.
हर संकट दूर हो जाए